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| Kabj ke karan lakshan or jatiltayen |
कब्ज क्यों होती है(cause of constipation)
कभी- कभी कब्ज होना अधिकतर लोगों के लिए सामान्य बात है और अक्सर साधारण आहार परिवर्तनों या बिना डॉक्टरी सलाह के मिलने वाली दवाओं से इसका इलाज किया जा सकता है। मल के कठोर होने व सूखने के कारण कब्ज होता है , सुखा और कठोर मल पाचन तंत्र से बहुत धीरे-धीरे गुजरता है, जिससे मल त्याग दुष्कर हो जाता है।
कभी कभी किसी स्वास्थ्य समस्या को ठीक करने के लिए ली जाने वाली दवा के दुष्प्रभाव के रूप में कब्ज हो सकती है, जिसका प्रभाव दवा के बंद होने के बाद कुछ दिनों तक रह सकता है।
हाइपोथायरायड विकार के कारण हार्मोनल इम्बैलेंस की वजह से भी कब्ज की समस्या हो सकती है।
तनाव अवसाद व चिंता के कारण ठीक से नींद नहीं आने के कारण बॉडी क्लॉक अनियमित हो जाती है जिसके कारण पाचन से जुड़ी समस्यायें भी उत्पन्न हो सकती है जिनमें कब्ज भी शामिल है।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कब्ज होने की संभावना दो से तीन गुना अधिक होती है जिसका कारण उनकी दिनचर्या हो सकता है, महिलाओं के कार्य अक्सर ऐसे होते है जिनमे श्रम नहीं होता है जिसकी वजह से पाचन क्रिया ठीक से नहीं होती है और कब्ज हो जाता है।
आज की जीवनशैली इस प्रकार की है की इसमें शरीरिक श्रम का अभाव उत्पन्न हो गया है, इसलिए नियमित व्यायाम करना आवश्यक है, क्योंकि उपलब्ध भोजन अधिकतर गरिष्ठ होता है।किंतु नियमित व्यायाम का अभाव कब्ज का कारण बनता है
आयु भी कब्ज का एक कारण होती है।65 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 50 प्रतिशत लोगोँ को कब्ज की समस्या का सामना करना पड़ता हे कारण उम्र के साथ पाचन शक्ति का कमजोर होना।
कम फाइबर युक्त आहार का सेवन कब्ज की वजह बनता है। आहार में फाइबर की पर्याप्त मात्रा पानी के अवशोषण द्वारा मल को ढीला कर मलत्याग को आसान बनती है।
पेल्विक फ्लोर या आउटलेट डिसफंक्शन के कारण, इसमें पेल्विक क्षेत्र में तंत्रिकाएं और मांसपेशियां ठीक से काम नहीं कर रही होती हैं जिससे मल त्याग करना मुश्किल हो जाता है।
इनके अलावा बृहदान्त्र उत्तेजक रेचक के अत्यधिक उपयोग के कारण, मल त्याग को टालना,चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस),अपर्याप्त तरल पदार्थ का सेवन गर्भावस्था आदि भी कब्ज के कारण है।
कुछ लोगों के पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली में अनियमितता जैसी जटिल समस्याएँ होती हैं, जो दीर्घकालिक रूप में कब्ज का कारण बनती हैं। , लगातार कब्ज बने रहना आंतों को क्षतिग्रस्त कर सकता हैं या आंतें बंद भी हो सकती हैं, जिसके लिए सर्जरी या अधिक गहन उपचार की आवश्यकता होती है।
कब्ज को कैसे पहचाने(symptoms of constipation)
कब्ज को पहचानने के लिए पाचन तंत्र से जुड़े कुछ लक्षणों को ध्यान में रखना होगा। ये लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:
(1)अक्सर ऐसा महसूस होना कि सारा मल बाहर नहीं निकला है, कुछ मल अभी भी आंतों में फंसा है।
(2) सप्ताह में तीन बार से कम मल त्याग या मलत्याग की आव्रति कम होना।
(3)कठोर, सूखा या गांठदार मल, जिसको त्यागने के लिए जोर लगाना पड़ता हो।
(4)मलत्याग कठिनाई से होना, अक्सर मल त्याग के दौरान तनाव या दर्द होना।
कब्ज की जटिलताएँ(complications of constipation)
कहते है खराब पाचन बीमारियों की जड़ होती हैं।खराब पाचन के कारण कब्ज होती है, कब्ज के कारण निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:
(1)गुदा के आसपास की त्वचा में दरारें आ सकती है जिसे गुदा विदर कहते है यह स्थिति मलत्याग को और कठीन बना देती है।
(2) लगातार कब्ज बने रहने से बवासीर की समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिसमें मलत्याग के दोरान असहनीय दर्द होता है जो मलत्याग को कठीन बना देता है।
(3) बवासीर की समस्या गंभीर होने पर मलाशय से रक्तस्राव शुरू हो सकता है जो अत्यधिक कठिन स्थिति है।
गंभीर कब्ज से और भी गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:
रेक्टल प्रोलैप्स - बड़ी आंत शरीर के अंदर से अलग हो जाती है और मलाशय से बाहर निकल जाती है, जिससे गुदा की मांसपेशियों और पैल्विक तंत्रिकाओं में खिंचाव आ जाता है, जिससे अक्सर क्षति होती है।
मल का जमाव - सूखा, गांठदार मल बृहदान्त्र के अंदर फंस जाता है और बाहर नहीं निकलता।

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